बलिदानो की एक विधि है,
संकल्पो से प्राप्त निधि है !
गिरते, सम्हालते चलना है
चाल यहाँ किस्की सधी है ?
गृहस्ताश्रम के खँडहर समेटे
दांपत्य सुख स्वप्न है क्षणभर की।
कभी संगिनी थी जीवन भर की ?
अब अवसर और स्मरण भर की।
वंश आगे को चलाने
विवाह व्यापार में शिरकत लो !
हस हस कर व्यथा छुपाना सीखो
अंदर रक्त झरते है झरने दो !!
संकल्पो से प्राप्त निधि है !
गिरते, सम्हालते चलना है
चाल यहाँ किस्की सधी है ?
गृहस्ताश्रम के खँडहर समेटे
दांपत्य सुख स्वप्न है क्षणभर की।
कभी संगिनी थी जीवन भर की ?
अब अवसर और स्मरण भर की।
वंश आगे को चलाने
विवाह व्यापार में शिरकत लो !
हस हस कर व्यथा छुपाना सीखो
अंदर रक्त झरते है झरने दो !!
दांपत्य इकाई है, संस्कारों का !
जीवन शैली के अधिकरो का !!
समाज के अस्तित्व की नीव है।
है मूल भारतीयता के प्रमाणों का।
वरमाला की डोर से ही,
परिवारों में समर्पण है।
एकता में बल है और,
चेतना का अर्जन है। सभ्यताओं की समाधि पर
एक हम शेष खड़े है, अजर।
सदियों से, बहुत कुछ खो कर भी,
चला है, तिमिर से दीपक लौ का समर।
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