कितने नादां थे, इस सच्चाई से बचते रहे।
हम अपनी हसरतों को मुहब्बत समझते रहे।
कितने नादां...
जिनकी चाहत की, उनके भी तो अरमां होंगे।
जरूरी थोड़े है, वो भी हमपे मेहरबाँ होंगे।
ख़ुदपे भी तो कुछ काम किया होता तूने।
तुझे पाकर, उसे भी तो वजह ए गुमान होते ।
कितने नादाँ...
ना औकात से ज्यादा मिला है, ना किस्मत से कम कभी।
बेतहाशा पाने पे खुश हुए, और ना पाने पे हुए ग़म कभी।
जिस उम्मीद पेbजीता है, वही करता है आंखे नम कभी।
जुनून पे था भरोसा, शिद्दत पे ऐतबार से बचते रहे।
कितने नादां थे, इस सच्चाई से बचते रहे।
हम अपनी हसरतों को मुहब्बत समझते रहे
कितने नादाँ... कितने नादाँ... हम कितने नादाँ...।
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